बनना चाहते हैं शेयर बाजार का 'शेर' तो आसान भाषा में समझें सेंसेक्स और निफ्टी का खेल

अगर आप कम समय में कमाना चाहते हैं ज्यादा पैसा. करना चाहते हैं शेयर बाजार में निवेश तो जानिये शेयर बाजार का गणित. हम आपको बता रहे हैं क्या है शेयर बाजार और कैसे करता है काम. क्या है BSE और NSE. शेयर बाजार में कितना है खतरा. निवेश के लिए क्या है नियम ?

हैदराबाद: वर्तमान में हर शख्स निवेश और कमाई करना चाहता है, लेकिन वो कहां और कैसे निवेश करें इसकी जानकारी नहीं होती है. कई लोग शेयर बाजार में उतरना चाहते हैं, लेकिन उनके पास शेयर बाजार की समझ नहीं होती है. ऐसे में आज हम आपको शेयर बाजार का सारा गणित बता रहे हैं. जिससे आप आसानी से शेयर बाजार में निवेश और उसके काम करने के तरीकों को जान जाएंगे.

क्या है शेयर बाजार ?
शेयर का मतलब हिस्सा होता है. बाजार खरीद-बिक्री की जगह को कहते हैं. मतलब शेयर बाजार का शाब्दिक अर्थ है हिस्सा खरीदने और बेचने वाली जगह. भारत में दो प्रमुख बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज शेयर बाजार है. शेयर मार्केट यानी शेयर बाजार में रजिस्टर्ड कंपनियां अपनी हिस्सेदारी खरीदती या बेचती है. शेयर खरीदने और बेचने के लिए BSE या NSE का उपयोग किया जाता है. रजिस्टर्ड कंपनियां शेयर ब्रोकर के जरिये हिस्सेदारी बेचती या खरीदती है. शेयर बाजार में कोई इंडिविजुअल व्यक्ति भी शेयर खरीद या बेच सकता है. इसके लिए उसे कुछ शर्तों का पालन करना होता है. शेयर बाजार में घरेलू कंपनियों या व्यक्ति के साथ विदेशी निवेशक भी निवेश कर सकते हैं.

BSE या NSE में कैसे लिस्ट होती है कंपनियां ?
शेयर बाजार में रजिस्टर्ड होने के लिए कंपनियों को एक लिखित समझौता करना पड़ता है. इसके बाद पूंजी बाजार नियामक यानी सेबी (SEBI) के पास कंपनी को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करानी होती है. दस्तावेजों की जांच और सही पाये जाने के बाद कंपनी BSE या NSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) में लिस्टेड हो जाती है. BSE या NSE में लिस्टेड कंपनी को समय-समय पर अपनी हर गतिविधि को शेयर बाजार में बतानी होती है. इसमें निवेशकों से जुड़ी लाभ-हानि की जानकारी शामिल होती है.

व्यक्तिगत रूप से कैसे ले सकते हैं शेयर ?
कंपनियों के अलावा कोई भी शख्स इंडिविजुअल यानी व्यक्तिगत रूप से शेयर बाजार में निवेश कर सकता है, यानी किसी भी कंपनी का हिस्सेदारी खरीद या खरीदे हुए हिस्सेदारी को बेच सकता है. इसके लिए निवेशक को किसी ब्रोकर की मदद से एक डीमैट अकाउंट खुलवाना होता है. डीमैट अकाउंट खुलने के बाद शख्स को अपने बैंक अकाउंट से डीमैट अकाउंट को लिंक करना होता है. इसके बाद बैंक अकाउंट से डीमैट अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर ब्रोकर की मदद से या खुद किसी कंपनी के शेयर को खरीद सकते हैं. शेयर खरीदते ही वो डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है, इसके बाद शेयर खरीदने वाला शख्स जब भी चाहें ब्रोकर के माध्यम से या खुद से भी उस हिस्सेदारी को बेच सकते हैं.

कैसे काम करता है शेयर बाजार ?
शेयर बाजार एक तरह से आइडिया बेचने का भी जगह है. जैसे किसी शख्स के पास कोई आइडिया है, लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं. ऐसे में वो या तो किसी निवेशक से मदद ले सकता है या सीधे शेयर बाजार में आ सकता है. नई कंपनियों को शेयर बाजार में आने के लिए सेबी (पूंजी बाजार नियामक) की कुछ शर्तों को माननी जरूरी है. शेयर बाजार में सिर्फ नई कंपनी ही नहीं पुरानी कंपनियां भी आ सकती है. शेयर बाजार में आने के बाद लोग या दूसरी कंपनियां उस कंपनी की हिस्सेदारी को खरीदेगी.

शेयर में निवेश कर बन सकते हैं अमीर!
दुनिया में हर कोई अमीर बनना चाहते है. इसके लिए सभी अपने-अपने तरह से प्रयास भी करते हैं. वैसे तो अमीर बनने के कई रास्ते भी होते हैं, लेकिन कई बार ऐसे रास्तों में जोखिम भी ज्यादा होता है. अमीर बनने के लिए शेयर बाजार भी एक रास्ता है. जिससे लोग कम समय में अमीर बन सकते हैं, हालांकि इसमें जोखिम भी है. शेयर बाजार में निवेश करते वक्त किसी को भी काफी सावधान रहना होता है. निवेश से पहले सतर्कता और प्लानिंग की जरूरत होती है. हमेशा एक बेहतर प्लानिंग के साथ  किए गए निवेश का अच्छा आउटकम आता है. ऐसे में अगर निवेशक के पास निवेश करने के लिए अच्छी रकम है तो वो अच्छी कमाई भी कर सकता है. शेयर मार्केट का एक नियम कहता है कि थोड़ा-थोड़ा इन्वेस्टमेंट बेहतर रिटर्न की गारंटी देता है.

क्या है सेंसेक्स और निफ्टी ?
शेयर बाजार में हमेशा सेंसेक्स और निफ्टी का जिक्र आता है. दरअसल, सेंसेक्स और निफ्टी इंडेक्स यानी सूचकांक होता है. सेंसेक्स अंग्रेजी के दो शब्द सेंसिटिव और इंडेक्स से बना है. जिसे हिंदी में सूचकांक कहते हैं. कंपनियों की आर्थिक मूल्यांकन सेंसेक्स से ही होता है. सेंसेक्स शेयर बाजार में कंपनियों के वित्तीय हालात का पैमाना होता है. भारत में 30 कंपनियां ही बीएसई में लिस्टेड होती है, जिसका सेंसेक्स अनुमानित होता है. ये कंपनियां स्थाई नहीं होती है. समय-समय पर ये कंपनियां बदलती रहती है. इंडेक्स कमेटी इन 30 कंपनियों का चुनाव करती है.
निफ्टी भी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक होता है. निफ्टी अंग्रेजी के दो शब्द नेशनल और फिफ्टी से मिलकर बना है. इसके तहत 22 अलग-अलग सेक्टर की 50 कंपनियां लिस्टेड होती है. इन 50 कंपनियों के आर्थिक मूल्यांकन निफ्टी सूचकांक से तय होता है. सेंसेक्स और निफ्टी के अलावा भी कई सूचकांक होते हैं. हालांकि भारत में यहीं दोनों सूचकांक महत्वपूर्ण है.

शेयर भाव में क्यों होता है उतार-चढ़ाव?
शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का सूचकांक बढ़ते-घटते रहता है. इसके पीछे कंपनी के कामकाज के तरीके, नए ऑर्डर मिलने, प्रोडक्ट के नतीजे, कंपनी का मुनाफा पर निर्भर करता है. शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां हर दिन कारोबार करती है. जिसमें कुछ न कुछ बदलाव होते रहता है. इन्हीं बदलावों पर कंपनियों का मूल्यांकन होता है. कंपनियों के मूल्यांकन के आधार पर उसके शेयर का भाव बढ़ते या घटते रहता है. इन सबके बीच अगर कोई कंपनी सेबी के नियमों या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की शर्तों के साथ कोई छेड़छाड़ करती है, तो उस कंपनी को लिस्ट से बाहर कर दिया जाता है.


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