पाकिस्तानी जासूस की HC में हुई अहम सुनवाई, सरकार से कोर्ट ने 7 दिनों के अंदर मांगा ये जवाब…

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में पाकिस्तानी जासूस से जुड़े मामले में अहम सुनवाई हुई है। हाइकोर्ट की डिवीजन बेंच में सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता पाकिस्तानी जासूस है। लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से उसे खुला नहीं छोड़ा जा सकता है।

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में पाकिस्तानी जासूस से जुड़े मामले में अहम सुनवाई हुई है। हाइकोर्ट की डिवीजन बेंच में सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता पाकिस्तानी जासूस है। लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से उसे खुला नहीं छोड़ा जा सकता है।

कोर्ट से कहा वह अवैध हिरासत में नहीं है, उसे डिटेंसन सेंटर में रखा गया है। कानून संबंधित प्रक्रिया पूरी कर उसे बाघा बोर्डर पर छोड़ना था, लेकिन कोविड की पहली और दूसरी लहर के चलते यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में कोर्ट ने इस कार्यवाही को लेकर शासन को लिखित में जवाब पेश करने के लिए सात दिन का समय दे दिया है।

2006 को पुलिस ने किया था गिरफ्तार

दरअसल 13 मार्च 2006 को इंदरगंज पुलिस ने अब्बास अली खान नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उसके पास एक ड्राइविंग लाइसेंस मिला था, जिसे उसने भारत आने के बाद बनवाया था। उसे पाकिस्तान के लिए जासूसी करने व फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

सजा के आदेश को दी थी चुनौती 

मामले में उसे कोर्ट ने 14 साल की सजा सुनाई थी। वहीं इस सजा के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए आदेश दिया था कि 14 साल की सजा पूरी की जाए। उसके बाद ही पाकिस्तान भेजे जाने के लिए मध्य प्रदेश शासन उसे बाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान को सौंपकर आये।

फरवरी में हो चुकी है 14 साल की सजा पूरी

अब्बास की फरवरी 2021 में 14 साल की सजा पूरी हो चुकी है। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार उसे बाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान को सुपुर्द करना था, लेकिन कोविड के चलते उसे पाकिस्तान भेजने की कार्रवाई नहीं हो सकी। ऐसे में उसे जेल से डिटेंसन सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया है।

जेल में अवैध रूप से बंधक बनाने का लगाया था आरोप

इधर अब्बास अली खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया है कि उसे जेल में अवैध रूप से बंधक बनाया गया है। उसकी सजा पूरी हो चुकी है। उसे जेल में नहीं रखा जा सकता है। ऐसे में पिछली सुनवाई पर शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। लिहाजा नोटिस का जबाब प्रस्तुत करते हुए शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता एके निरंकारी उपस्थित हुए थे।

 


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