कैलाश रवि, पुष्पराजगढ़: वैसे भी जनता को कभी सुविधाएं नहीं मिलती. अक्सर उनका खून चूसा जा...

कैलाश रवि, पुष्पराजगढ़: वैसे भी जनता को कभी सुविधाएं नहीं मिलती. अक्सर उनका खून चूसा जाता है. जनता को ही सिस्टम की मार झेलनी पड़ती है. आज करीब एक महीने से आम जन को परेशान किया जा रहा है. जो लोग 30 रुपये में अनूपपुर पहुंचते थे और अपना काम कराकर वापस लौटते थे. आज उनको सिस्टम की लापरवाही, लाचारगी, करप्शन और नाकामी के कारण 80-90 रुपये में अनूपपुर तक पहुंचाना पड़ रहा है. डीजल-पेट्रोल की मार कम थी, जो सिस्टम की नाकामी ने आमजन पर नया चाबुक चला दिया, जिससे लोगों की जेबें ढीली हो रही है. दरअसल, ये मामला पुष्पराजगढ़ का है. जहां से जिला मुख्यालय अनूपपुर, शहडोल और रीवा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग किरर घाट पर घटिया निर्माण हुआ है, जो पहली ही बारिश में धराशायी हो गया.    किरर घाट का मार्ग अवरुद्ध हो गया है. पहाड़ से पत्थर गिर जाने से मार्ग टूट गया है. अब तक अस्थाई मार्ग चालू नहीं किया गया है. पुष्पराजगढ़ से जैतहरी अनूपपुर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर  तय करके जिला मुख्यालय अनूपपुर जाना पड़ता है. इस घाट के टूटने के कारण कई लोगों की जान हर रोज दांव पर लगती है, लोग अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर हैं. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अभी हाल ही में बैहर घाट में बस पलट गई थी, जिससे एक की मौत हो गई, जबकि कई लोग जख्मी हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि कोई जनप्रतिनिधियों ने घायलों की जानकारी नहीं ली. बाद में रोटी सेकने जरूर पहुंचे और अब आंदोलन की चेतावनी का झुनझुना दिया जा रहा है. अब बात करते हैं पुष्पराजगढ़ की सांसद महोदया हिमाद्री सिंह, जो अक्सर अपने इलाके से लापता रहती हैं. इनको जनता से कोई लगाव नहीं होता है. ऐसा हम नहीं स्थानीय लोगों का कहना है. इलाके में ये महोदया टूर्नामेंट कराने के अलावा आज तक पुष्पराजगढ़ तो छोड़िए अपने संसदीय क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं कर पाई.  हमारी टीम ने जब बस से सफर कर रहे लोगों से किराया, इलाके जनप्रतिनिधियों के बारे में पूछा तो, उन्होंने जो कहा उससे हम लिख नहीं सकते. क्योंकि इनकी नाकामियों को जनता भी खुली आंखों से देख रही है. बहरहाल, आमजन का हाल बेहाल है. न जनप्रतिनिधियों की आंखें खुल रही है और न कुम्भकर्ण की नींद सो रहा सिस्टम जाग रहा है. लगता है सिस्टम फिर से किसी हादसे का वेट कर रहा है. घाट टूटने से करप्शन तो साफ आंखों से दिख गया और जनप्रतिनिधियों की नाकामी भी आज आम जन खुली आँखों से देख चुके हैं. बस सिस्टम से सैकड़ों सवाल दाग रहे हैं.