मोबाइल खो जाए तो तुरंत करें ये काम, पुलिस भी खुशी-खुशी कर देगी

मामला संज्ञेय अपराध का हो तो पुलिस को प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करनी होती है और अगर पुलिस एफआईआर दर्ज न करे को पीड़ित पक्ष इसके लिए संबंधित अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। लेकिन कई ऐसे मामले भी होते हैं जो संज्ञेय अपराध की कैटिगरी में नहीं आते। इन मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज न करके एनसीआर यानी नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट दर्ज करती है.

मामला संज्ञेय अपराध का हो तो पुलिस को प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करनी होती है और अगर पुलिस एफआईआर दर्ज न करे को पीड़ित पक्ष इसके लिए संबंधित अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। लेकिन कई ऐसे मामले भी होते हैं जो संज्ञेय अपराध की कैटिगरी में नहीं आते। इन मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज न करके एनसीआर  यानी नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट दर्ज करती है.

क्या है FIR और NCR ?          
अपराध दो तरह के होते हैं संज्ञेय यानी कॉग्निजेबल ऑफेंस और गैर-संज्ञेय यानी नॉन कॉग्निजेबल। बेहद गंभीर अपराध संज्ञेय की कैटिगरी में आते हैं और कम गंभीर अपराध गैर-संज्ञेय कैटिगरी में आते हैं। गैर-संज्ञेय अपराधों में सीधे एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान नहीं है। ऐसे मामले में जब पुलिस को रिपोर्ट की जाती है तो वह सिर्फ डायरी-एंट्री करती है, यानी ऐसे मामले में पुलिस एनसीआर दर्ज करती है।
किन मामलों में दर्ज होता है NCR
कोई भी ऐसा मामला जो संज्ञेय न हो, जैसे किसी का कोई सामान खो गया हो या गिर गया हो। इसी तरह किसी का मोबाइल गुम हो जाए या पर्स खो जाए, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी के कागज आदि हों तो ऐसे मामले में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई जाती है । तब पुलिस एनसीआर दर्ज करती है। इससे पीड़ित को अपने खोए हुए डॉक्युमेंट्स को दोबारा बनवाने में मदद मिलती है।
इसकी जरूरत क्यों पड़ती है ?
गैर-संज्ञेय मामलों में पुलिस को सूचित करने से पीड़ित पक्ष का बचाव हो जाता है। उदाहरण के लिए मोबाइल फोन खो जाने पर पुलिस को दी गई सूचना में मोबाइल के बारे में डिटेल बतानी होती है और फिर उस आधार पर एनसीआर दर्ज हो जाती है। इसकी एक कॉपी शिकायती को मिलती है। इसका फायदा यह होता है कि बाद में उस मोबाइल का इस्तेमाल अगर कोई अपराधी अपराध के लिए करता है तो मोबाइल मालिक अपनी जवाबदेही से बच जाता है। एनसीआर के आधार पर उसका बचाव यह होता है कि उसका मोबाइल फोन गुम हो गया था और पुलिस को भी पहले ही सूचित किया जा चुका है।
NCR दर्ज होने के बाद पुलिस का दायित्व
एनसीआर दर्ज होने के बाद पुलिस उसकी कॉपी अपने रिकॉर्ड में रखती है। अगर गुम हुआ सामान मिल जाए या पुलिस को उसके बारे में जानकारी मिले तो सामान रिकवर कर लेती है। इस तरह केस सुलझ जाता है। पुलिस कागजी और कानूनी प्रक्रिया के तहत शिकायती को वह मोबाइल या सामान दे देती है। अगर पुलिस सामान नहीं खोज पा रही है और शिकायती अपने केस का स्टेटस पता करने के लिए अदालत पहुंच जाता है तो सामान न मिल पाने की सूरत में पुलिस अनट्रेसेबल रिपोर्ट दाखिल करती है। इस तरह केस बंद हो जाता है।

डिसक्लेमर : उक्त विचार कानूनी जानकार के हैं.